हर बच्चे को मिले सुरक्षित, सम्मानजनक और निश्चिंत बचपन — न्यायाधीश खारोल


कुचामन सिटी। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार “Transformative Tuesday” अभियान के तहत कुचामन सिटी के कस्तूरबा गांधी विद्यालय एवं कस्तूरबा गांधी निवास विद्यालय में विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया। शिविर में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुन्दर लाल खारोल तथा वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती कामाक्षी मीणा ने विद्यार्थियों को संबोधित कर साइबर सुरक्षा और कानूनी अधिकारों की महत्वपूर्ण जानकारी दी।


कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के थीम सांग “एक मुट्ठी आसमा, न्याय सभी के लिए” के साथ हुई। अपने संबोधन में न्यायाधीश सुन्दर लाल खारोल ने कहा कि इंटरनेट आज हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा चोरी और फेक न्यूज जैसे खतरे भी जुड़े हैं। उन्होंने छात्रों को आगाह करते हुए कहा कि व्यक्तिगत जानकारी जैसे OTP, बैंक डिटेल्स और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करें, मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें और अनजान लिंक या ई-मेल से दूरी बनाए रखें।


उन्होंने विशेष रूप से बच्चों में बढ़ती मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया का गलत उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। बच्चों को तकनीक का सही और सीमित उपयोग करना चाहिए तथा किसी भी प्रकार के साइबर दुर्व्यवहार पर बिना डर के शिकायत करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और शांतिपूर्ण बचपन का अधिकार है।


वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश श्रीमती कामाक्षी मीणा ने अपने संबोधन में बताया कि साइबर दुर्व्यवहार भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दंडनीय अपराध है। कानून बच्चों को ऑनलाइन धमकी, उत्पीड़न, स्टॉकिंग और ब्लैकमेलिंग से सुरक्षा प्रदान करता है तथा पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध करवाई जाती है। उन्होंने बच्चों को 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 1930 साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन की जानकारी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता लें और किसी भी घटना को छुपाएं नहीं।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई बच्चा अचानक चुप रहने लगे, डरने लगे, तनाव में दिखाई दे या दोस्तों से दूरी बनाने लगे, तो यह साइबर दुर्व्यवहार का संकेत हो सकता है।

ऐसे में बच्चों को तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर अपराध पीड़ित की नहीं, बल्कि अपराधी की गलती होती है।
शिविर के दौरान विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सतर्कता बरतने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वासी और जागरूक नागरिक बनाना रहा।

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