कुचामन सिटी निवासी शकील मोहम्मद और अफसाना बानो की सात वर्षीय पुत्री एलिस फातिमा ने रमज़ान के पाक महीने के 11 वें दिन रविवार को अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखकर परिवार को खुशी और फख्र का खास मौका दिया। कम उम्र में इबादत के प्रति ऐसा जज़्बा देखकर घर का माहौल पूरी तरह रूहानी रंग में रंग गया।

एलिस फातिमा ने सुबह जल्दी उठकर सहरी में हिस्सा लिया और पूरे शौक़ के साथ रोज़ा रखने की नीयत की। माता-पिता ने उन्हें रोज़े की अहमियत समझाते हुए बताया कि रोज़ा सब्र, शुक्र और अपने अंदर अच्छाइयों को बढ़ाने का ज़रिया है। दिन भर एलिस ने हिम्मत और मुस्कान के साथ रोज़ा रखा तथा समय-समय पर दुआएं भी पढ़ती रहीं।
शाम को इफ्तार के समय घर में खास तैयारी की गई। जैसे ही इफ्तार का वक्त हुआ, एलिस फातिमा ने दुआ के साथ खजूर से अपना पहला रोज़ा खोला। इस खास पल पर परिवारजनों ने उन्हें गले लगाकर मुबारकबाद दी,माला पहनाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की। घर में खुशी का इज़हार किया गया।

दादा इसहाक मोहम्मद ने इस मौके पर कहा, “हमारी पोती ने आज हमें बहुत खुशी दी है। छोटी उम्र में रोज़ा रखना उसके अच्छे संस्कार और परवरिश का सबूत है। हम दुआ करते हैं कि वह तालीम और दीन दोनों में कामयाबी हासिल करे।”
दादी मेम बानो ने भावुक होकर कहा, “बच्चों को जब प्यार से दीन की बातें सिखाई जाएं तो वे खुद शौक से इबादत की तरफ आते हैं। एलिस का पहला रोज़ा हमारे लिए यादगार लम्हा है।”
