कुचामन सिटी के वेस्ट गेट क्षेत्र में उस समय रूहानी माहौल देखने को मिला जब स्थानीय निवासी सलीम मणियार और मलका बानो के 7 वर्षीय पौत्र मोहम्मद अनस ने रमजान के पवित्र महीने के तीसरे रोजे के दिन अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा। इतनी कम उम्र में अनस का यह संकल्प हर किसी के लिए प्रेरणादायक बन गया।
अनस के पिता मोहम्मद यूसुफ और अम्मी नर्गिस बानो ने बताया कि अनस ने खुद ही रोजा रखने की इच्छा जताई थी। परिवार ने पहले उसे समझाया, लेकिन उसके दृढ़ निश्चय और उत्साह को देखकर सभी ने उसका हौसला बढ़ाया। पूरे दिन अनस ने बिना पानी और भोजन के रहकर सब्र और इबादत का परिचय दिया। उसकी मासूमियत और आस्था ने घर के माहौल को पूरी तरह से इबादत की रौशनी से भर दिया।

शाम को जब रोजा मुकम्मल हुआ तो अनस ने पूरे परिवार के साथ बैठकर देश में अमन-चैन और आपसी सौहार्द के लिए दुआएं कीं। इसके बाद सभी ने मिलकर इफ्तारी की और मग़रिब की नमाज अदा की। रोजा खोलने के बाद परिवारजनों ने अनस को माला पहनाकर उसकी हौसला अफजाई की और उसके जज़्बे की सराहना की।
मासूम अनस की धार्मिक आस्था, संयम और सब्र को देखकर क्षेत्रवासी भी प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों ने इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी में ऐसी भावना समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। अनस का यह पहला रोजा न केवल उसके परिवार के लिए गर्व का क्षण बना, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय भी रहा।
