दड़ीबा बीदासर निवासी एवं वर्तमान में बड़ौदा (गुजरात) प्रवासी शंकरलाल पलोड़ के सुपुत्र हार्दिक पलोड़ ने कुचामन सिटी के नर्मदा गार्डन में जगदीश जलधारी की सुपुत्री ममता जलधारी के साथ सात फेरे लिए। दूसरी शादियों की तरह ये शादी केवल जीवनसाथी के मिलन का अवसर नहीं रही, बल्कि समाज के नाम एक सशक्त और प्रेरणादायी संदेश बनकर सामने आई।

हार्दिक पलोड़ ने दाधीच ब्राह्मण समाज में एक उल्लेखनीय उदाहरण पेश करते हुए वधु पक्ष से दहेज के रूप में कुछ भी लेने से साफ इंकार कर दिया। विवाह मात्र एक रुपए व श्रीफल लेकर संपन्न किया गया। दहेज जैसी कुप्रथा के विरुद्ध यह साहसिक कदम समारोह में उपस्थित हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का केंद्र बना और सामाजिक चेतना का सजीव प्रतीक भी।
समारोह में उपस्थित समाजजनों, परिजनों और अतिथियों ने हार्दिक पलोड़ के इस निर्णय की दिल खोल कर तारीफ की। सभी ने नवदंपति को सुखमय एवं समृद्ध दांपत्य जीवन के लिए आशीर्वाद देते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज भी अनेक परिवार दहेज के बोझ से टूट जाते हैं—कभी आर्थिक रूप से तो कभी मानसिक पीड़ा से। ऐसे में इस तरह के दहेज-मुक्त विवाह न केवल एक आदर्श मिसाल हैं, बल्कि समाज को जड़ से बदलने वाली नई सोच का प्रारंभ भी हैं।
“होडा होडी गोडे ना फोड़े” जैसी लोक-वाणी का सार इस विवाह में स्पष्ट रूप से नजर आया, जहां दिखावे पर नहीं, बल्कि सरलता, संस्कार और सामाजिक जागरूकता को प्राथमिकता दी गई।
हार्दिक–ममता का यह विवाह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक उदाहरण बन गया है—यह साबित करते हुए कि बदलाव बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि सही सोच और साहसिक निर्णयों से शुरू होता है।
