कुचामनसिटी, कुचामन नगर परिषद की राजनीति में चल रहे लंबे “शह और मात” के खेल का अब पटाक्षेप हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आसिफ खान की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया। इसके साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए आदेश को सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है।
अब एक बार फिर सुरेश सिखवाल उर्फ बबलू सिखवाल ही कुचामन नगर परिषद के विधिवत सभापति बने रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार का पक्ष रहा मजबूत
मामले की सुनवाई 07 नवम्बर 2025 को हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम याचिकाकर्ता की विशेष अनुमति याचिका पर विचार करने से इनकार करते हैं। याचिका खारिज की जाती है।
सरकार की ओर से अधिवक्ता शिव मंगल शर्मा (AAG), एम.एल. सोनाली गौड़ और एम.एस. निधि जसवाल ने प्रभावी पैरवी की। सरकारी अधिवक्ताओं की कानूनी तैयारी और ठोस दलीलों के कारण अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

पहले हाईकोर्ट ने पलटी थी बाज़ी
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर की डिवीजन बेंच ने अक्टूबर में आसिफ खान को मिले स्थगन आदेश को रद्द करते हुए स्वायत्त शासन विभाग के 21 अगस्त 2025 के आदेश को वैध ठहराया था। उसी आदेश के अनुसार, विभाग ने 28 अक्टूबर 2025 को अधिसूचना जारी कर सुरेश सिखवाल को 60 दिन या अगले आदेश तक सभापति पद का अधिकार सौंपा था।
सिखवाल बोले — सच्चाई की जीत हुई, सरकार और जनता का आभार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभापति सुरेश सिखवाल ने कहा कि यह न्याय और सच्चाई की जीत है। हमने हमेशा नियमों के तहत कार्य किया। अदालत ने भी सच्चाई के पक्ष में निर्णय दिया।

मैं राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग मंत्री झाबर सिंह खर्रा और स्थानीय विधायक एवं राजस्व राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने हर कदम पर मार्गदर्शन और समर्थन दिया। सिखवाल ने समर्थकों और नगर परिषद कर्मचारियों को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि अब नगर परिषद के विकास कार्यों को नई गति दी जाएगी।
राजनीतिक हलकों में हलचल
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कुचामन की राजनीति में फिर से चर्चा का दौर शुरू हो गया है। लगातार उलटफेर के बाद अब मामला स्पष्ट हो गया है कि सभापति की कुर्सी पर सुरेश सिखवाल ही काबिज रहेंगे और आसिफ खान की कानूनी लड़ाई यहीं समाप्त हो गई है।
