मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को मिला “क़ुत्ब-ए-बनारस अवार्ड” और “दाई-ए-इस्लाम” का खिताबइस्लामी, तालीमी और समाजी खिदमात के लिए बनारस में हुआ एज़ाज़

डीडवाना के शेरानी आबाद के जाने-माने आलिमे-दीन मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को बनारस की मशहूर तंजीम “तहरीक-ए-फलाह-ए-उम्मत” की जानिब से “क़ुत्ब-ए-बनारस अवार्ड” और “दाई-ए-इस्लाम” के मानद खिताब से नवाज़ा गया। यह एज़ाज़ “मुहसिने इंसानियत कॉन्फ़्रेंस” के दौरान अता किया गया, जो उर्से कबीर शाह के मौके पर कमालपुर, बनारस की मशहूर दरगाह ख़ानक़ाहे ख़ैरिया में मुनक्किद हुई।

अवॉर्ड और खिताब मुफ़्ती मोहम्मद उवैस ख़ैरी साहब (ख़ानक़ाहे ख़ैरिया, बनारस) के हाथों पेश किए गए। इस मौके पर शहर के उलमा, तलबा, और समाजी शख्सियात की बड़ी तादाद मौजूद रही।

कॉन्फ़्रेंस के मुंतज़िम मौलाना शकील अहमद मुजद्दिदी ने मुफ़्ती खालिद अय्यूब शेरानी की तालीमी और समाजी खिदमात का तफ़सीली ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने समाज में इल्म, अमन और इंसानियत का पैग़ाम आम करने में अहम किरदार अदा किया है। उन्होंने बताया कि मुफ़्ती साहब “तहरीक उलमा-ए-हिंद” के ज़ेरे निगरानी तालीम और जागरूकता के कई प्रोग्राम चला रहे हैं, जिनसे नौजवानों में इल्मी और फ़िक्री जागरूकता बढ़ रही है।

एज़ाज़ प्राप्त करते हुए मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी ने कहा, मैं खुद को इन दोनों इज़्ज़तों का हक़दार नहीं समझता, मगर अगर बनारस के दानिशवर लोगों ने मुझे इस क़ाबिल समझा है तो मैं उनका शुक्रगुज़ार हूँ। मैं अल्लाह तआला से दुआ करता हूँ कि वो मुझे अपने बंदों के इस गुमान के लायक़ बनाए।

इस मौके पर बनारस और आसपास के इलाक़ों से आए लोगों ने मुफ़्ती साहब को मुबारकबाद दी। शेरानी आबाद में यह खबर फैलते ही लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। समाजी और मज़हबी तंजीमें मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही को उनकी इस कामयाबी पर दुआओं और मुबारकबादों से नवाज़ रही हैं। लोगों ने कहा कि मुफ़्ती साहब की यह कामयाबी सिर्फ़ उनका नहीं, बल्कि पूरी इल्मी बिरादरी और शेरानी आबाद का फ़ख़्र है।

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