बेटी की बिंदोरी निकालकर पिता ने दिया समानता व महिला सशक्तिकरण का संदेश

कुचामन सिटी में एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला, जब नटवरलाल महर्षि ने अपनी बेटी श्रीदेवी मोना को घोड़ी पर बिठाकर पूरे पारंपरिक उत्साह और डीजे की थिरकती धुनों के बीच बिंदोरी निकाली। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती यह बिंदोरी न केवल खुशियों और उत्साह से भरी हुई थी, बल्कि समाज को एक गहरा संदेश भी दे रही थी कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं।

बिंदोरी में जहां घर-परिवार की महिलाएं और पुरुष कदमताल करते नजर आए, वहीं राहगीर भी इस अनोखी परंपरा को नई दिशा देने वाले इस आयोजन को देखकर रुक गए। कई लोग फोन पर वीडियो बनाते हुए कहते दिखे कि यह दृश्य सचमुच समाज में बदलते विचारों का प्रमाण है।

नटवरलाल महर्षि ने कहा कि शिक्षित और प्रगतिशील समाज में बेटा-बेटी में भेद करना अब बेमानी है। जो कार्य बेटे कर सकते हैं, वही बेटियां भी पूरे आत्मविश्वास और क्षमता के साथ कर सकती हैं। देशभर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया जाता है, और हमने अपनी बेटी की घोड़ी पर बिंदोरी निकालकर उसी संदेश को व्यवहार में लाने की कोशिश की है। इस अवसर पर घोड़ी पर सवार श्रीदेवी मोना ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियों की बिंदोरी निकालने का मकसद समाज के भीतर बैठे उस पुराने सोच को बदलना है, जिसमें बेटियों को सीमित दायरे में देखा जाता था। आज की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं—चाहे शिक्षा हो, खेल, राजनीति या समाज सेवा।

इस बिंदोरी ने कुचामनसिटी में महिला सशक्तिकरण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। जहां परंपराओं में बदलाव की शुरुआत अक्सर चुनौतीभरी मानी जाती है, वहीं महर्षि परिवार का यह कदम उदाहरण बनता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी पहलें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की ताकत रखती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनती हैं।

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