नगर परिषद कुचामन सिटी के सभापति आसिफ खान ने शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रभाषा हिंदी सम्मान समारोह के अवसर पर श्री कुचामन पुस्तकालय को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि “यह 100 साल पुराना पुस्तकालय केवल किताबों का भंडार नहीं, बल्कि कुचामन की धरोहर और हमारी शान है। इसके संचालन में भामाशाहों और प्रवासी बंधुओं का योगदान अनुकरणीय है। नगर परिषद का भी यह दायित्व है कि इस धरोहर के संरक्षण और विकास में यथासंभव सहयोग करे।”

अब तक नगर परिषद की ओर से पुस्तकालय को सालाना 40 हजार रुपए की सहायता दी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से राशि का भुगतान अटका हुआ था। इसकी जानकारी मिलने पर सभापति आसिफ खान ने घोषणा करते हुए कहा कि पुराने बकाया के साथ, अब से नगर परिषद हर साल पुस्तकालय को 2 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध कराएगी।

उन्होंने आगे कहा कि पुस्तकालय कार्यकारिणी के सदस्य जिस निष्ठा और समर्पण से इस संस्थान को जीवंत बनाए हुए हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नगर परिषद हमेशा इस ऐतिहासिक धरोहर के उत्थान और प्रगति में सहयोगी की भूमिका निभाएगी।
आसिफ खान के इस घोषणा के साथ ही पुस्तकालय परिसर तालियों से गूंज उठा। उपस्थित गणमान्यजनों ने इस निर्णय का स्वागत किया और पुस्तकालय कार्यकारिणी ने सभापति का माल्यार्पण कर और साफा बांधने के साथ स्मृति चिन्ह के साथ अभिनंदन किया।

गौरतलब है कि श्री कुचामन पुस्तकालय की स्थापना 1924 में हुई थी। 30 हजार से अधिक किताबों का संग्रह, दुर्लभ पांडुलिपियां और प्रतियोगी छात्रों के लिए चल रही ‘स्टूडेंट कॉर्नर’ जैसी पहलें आज भी इसे नगर की पहचान बनाए हुए हैं। लालटेन की रोशनी से शुरू हुआ यह पुस्तकालय आज भी सोशल मीडिया और इंटरनेट युग में पाठकों का आकर्षण बना हुआ है।

इस मौके पर प्राचार्य लक्ष्मण शर्मा, सुरेश वर्मा, बंसीलाल कांसोटिया, रामनिवास कुमावत, रमेश चावला, विमल पारीक, मुरारी गौड़, डॉ. राधेश्याम खटोड़, वेद प्रकाश शर्मा, भानु प्रकाश औदीच्य, दामोदर झंवर, रामस्वरूप जोशी, नितेश वक्ता, सुरेश पारीक, बजरंग लाल शर्मा, किशन लाल भार्गव, हरिमोहन बिरला, श्यामसुंदर मंत्री, सत्यनारायण तोषनीवाल, पार्षद इकराम भाटी, अयूब सोलंकी, संजय बियानी, गोपाल वक्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
